Sunday, March 30, 2008

चंदन सा बदन चंचल चितवन

चंदन सा बदन चंचल चितवन
धीरे से तेरा ये मुसकाना
मुजे दोष ना देना जगावालों
हो जाए अगर दिल दीवाना

ये विशाल नयन जैसे नील गगन
पंछी की तरह खो जाऊ मैं
सिरहाना जो हो तेरी बाहों का
अंगारों पे सो जाऊ मई

मेरा बैरागी मन दोल गया
देखी जो अदा तेरी मस्ताना


तन भी सुंदर, मन भी सुंदर
तू सुन्दरता की मूरत है
किसी और को शायद कम होगी
मुजे तेरी बहोत जरुरत है
पहले भी बहोत दिल तरसा है
तू और ना दिल को तरसाना




1 comment:

shajahan said...

मुझ॓ दोष ना देना जगावालों
That was wrong