Friday, June 27, 2008

बड़ी सूनी सूनी है ज़िंदगी ये ज़िंदगी

बड़ी सूनी सूनी है ज़िंदगी ये ज़िंदगी - (२)
मैं खुद से हूँ यहाँ अजनबी अजनबी
बड़ी...

कभी एक पल भी, कहीं ये उदासी
दिल मेरा भूले
कभी मुस्कुराकर दबे पाँव आकर
दुख मुझे छूले
न कर मुझसे ग़म मेरे, दिल्लगी ये दिल्लगी
बड़ी...

कभी मैं न सोया, कहीं मुझसे खोया
सुख मेरा ऐसे
पता नाम लिखकर, कहीं यूँही रखकर
भूले कोई कैसे
अजब दुख भरी है ये, बेबसी बेबसी
बड़ी...

2 comments:

Shwetha said...

As always...good one Sir jee :)

vinayakam said...

Thank u ...swethammi..